Monday, June 7, 2010

"विश्व पर्यावरण दिवस: छोड़ दी राजनीति मैने तेरे लिये"

http://upperhunter.local-e.nsw.gov.au/files/4870/File/community.jpghttp://thumbs.dreamstime.com/thumb_398/1242079845KZx1wm.jpgपर्यावरण और पर्यावरण दिवस पर बातें और भाषणबाजियां  तो बहुत हो चुकी,अब समय है कुछ करने का और यह एक ऐसा मुद्दा है जहाँ  हम अपनी गलतियों को दूसरों पर थोपकर आगे नहीं बढ़ सकते. तो फिर इंतजार किस बात की.किस एक धक्के का इंतजार है जो सबकुछ बदलने के लिये आवश्यक है उठिए जागिये और शुरू  हो जाइये आज से.अभी से एक बेहतर भविष्य के निर्माण के लिये. न कुछ बताने की ज़रूरत है और न ही समझाने की. बस तीन R, Reduce,Reuse और  Recycle के  concept को ध्यान में रखते हुए, ईमानदारी पूर्वक अपना काम करते हुए बढ़ते जाइये पर्यावरण  प्रदूषण नियंत्रण के मुहिम के इस अन्नंत यात्रा की तरफ.
                                                       कल दिन भर हुए क्रिया कलापों से कुछ बातें भी शेयर करता चलूँ. कल सुबह अपने कुछ दोस्तों के साथ ऊँची ऊँची इमारतों और शहर के हो हल्ले से दूर खेतों की पगडंडियों पर चलकर और किसानों से बात कर बिताया. वहाँ से लौटने के बाद जो शांति महसूस हो रही थी उसके बारे में आपको क्या बताऊँ? बस यूँ समझ लीजिये की यह मेरे अबतक के सबसे अच्छी सुबहों में से एक थी.
चुकीं हाल ही में परीक्षाएँ समाप्त हुई हैं इसलिए वहाँ से लौटने के बाद का समय दैनिक कार्यों को पूरा करने और पत्र पत्रिकाओं को पढ़ने में बिताया.लगभग तीन बजे से कॉलेज कैम्पस में ही शुरू हुए सेमिनार में शहर के गणमान्य  लोगों, विद्वानों और उद्योग जगत से जुड़ी बड़ी हस्तियों को सुनने और उनके बीच कुछ बोलने का मौका मिला. सबकी बातों को सुनकर मैंने जो निष्कर्ष निकला उसे मैंने पोस्ट में सबसे ऊपर स्थान दिया है क्योंकि कुछ लोगों को कम्मेंट करने कि इतनी जल्दी रहती है कि वो पूरा पोस्ट पढना मुनासिब नहीं समझते और फिर मुझे आप सबके सामने अपनी बात भी तो रख देनी थी????????????
सेमिनार में अपने द्वारा लिखी कुछ पंक्तियों को सुनाकर मैंने वाहवाही भी बटोरी जो यहाँ आपके लिये भी प्रस्तुत है................
कुछ खोकर कुछ पा लेने की स्थिति कहाँ  तक अच्छी  है
कुछ पाकर पाते जाने की कोई बात करो   तब   तो  जाने.
उपरोक्त पंक्ति लोगों के इस बात को ध्यान में रखकर लिखी गई हैं कि यदि विकास होगा तो पर्यावरण प्रदुषण भी बढेगा. कुछ हद तक यह बात सही भी है लेकिन हमें कुछ ऐसा करने कि ज़रूरत है जिससे विकास भी हो और प्रदुषण भी न हो.
हम उम्मीद करते हैं
बढ़ते तापमान के साथ कल्पना   के उड़ान   की
प्रदूषित जल के साथ  एक स्वस्थ मस्तिष्क की
प्रदूषित हवा के   साथ  एक   स्वस्थ शरीर  की
प्रदूषित   मृदा     से    उत्तरोत्तर  उत्पादन   की
संभव नहीं है   यह     तबतक    जबतक
हम जग नहीं जाते अपने दिवा स्वप्न से.

http://www.2dayblog.com/images/2009/june/saveenvironment.jpgविदेशी तकनीकि और पैसों पर निर्भर न रहने और अपने यहाँ मौजूद संसाधनों से ही स्वदेशी तकनीक विकशित करने के उद्देश्य से मैंने कुछ ऐसा लिखा.................
किसी मजार का दीया  क्या   कर   सकेगा
कोई उधर   का  दीया    कबतक     रहेगा
मेरा दीया जो    साथ  है    मेरे      निरंतर
मेरे तीमीर को बस   वही ही हर     सकेगा.

कुछ तो अपने और कुछ भारतीय  और विदेशी परिदृश्य  को ध्यान में रखते हुए मैंने अपनी ये पंक्ति भी सुनाई.................
दुनिया  तेरी    हर  चाल  से   वाकिफ     होता     हूँ
तू कही षणयंत्र बनती और मै कही चैन से सोता  हूँ
अपने शब्दों में जब भी तुमने मात दिया है   मुझको
मेरा भोलापन  शायद तब  छू   न     पाया   तुझको.
बहुत ज्यादा दिन का अनुभव नहीं रखता हूँ फिर मुझे कल और आज में भी बहुत अंतर दिखाई पड़ता है जिसे मैंने इन पंक्तियों में सहेजा है....................

ऐ प्रकृति के कोमल कृति देखा था तुमको बसा हुआ.
आज तुम्हे तुम्हारा इस दशा को
ईश्वरकृत  न्यायिक    दंश     कहूँ
या मानव   कृत     विध्वंश    कहूँ
पर जो भी कहूँ यह  सत्य कहूँ की
देखा था कभी  हरियाली     तुममे
तेरा बाहू पाश   था   कसा    हुआ
ऐ प्रकृति के कोमल कृति देखा था तुमको बसा हुआ.
http://iggydonnelly.files.wordpress.com/2009/06/world20environment20day6.jpgपर्यावरण प्रदुषण नियंत्रण के लिये मै भी कुछ प्रोजेक्ट्स पे काम कर रहा हूँ वे जैसे ही पूरा होंगे उनकी जानकारी और उससे जुड़े अपने अनुभव ब्लॉग के माध्यम से आप सब तक पहुंचाउंगा.अब तक आप पोस्ट के शीर्षक और पोस्ट के बीच सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे होंगे. चलते चलते ये बताता चलूँ की कल मै हाल ही में रिलीज मूवी राजनीति देखने जाने वाला था. टिकट भी ले लिया गया था. लेकिन मैंने पर्यावरण से सम्बंधित कुछ जानकारी लेना और अपने विचारों को सबके सामने रखने की बात  को श्रेयस्कर समझा मूवी देखने का प्लान कैंसिल कर दीया जो कि उपरोक्त शीर्षक का कारण बना.
धन्यवाद"

1 comment:

DR. PAWAN K MISHRA said...

kal maine tumhe suna. mujhe apne garv hota hai ki tum mere shishya ho. ek guru ki guruta uske shishyo se hoti hai sadiyo me tumhaare jaisee gravity wala shishya dharti par aata hai. apni maulikta bachaaye rakhna kyoki yahi tumhaari majbooti hai.ye desh ye vishva tumhe nihaar raha hai mere bachche.